Inside Nirvana

Friday’s wisdom,

Hello All

We spend so much time fighting our thoughts and been to hard on our selves and forever worrying and thinking about what other people think.
My advice to you read this and keep reading it, let everybody sink in their own thoughts and start living your life the way you want to live it.
Be kind and think of your words before saying them.
People are lesson or blessing, people come and go.
Be kind to your self and others.
Live in the moment.
Always step forward not back.
Let crap go you can’t control everything.
Enjoy your Friday and remember to be kind to your self and others and fill your feel good jar.

Stay away from energy vampires

Focus on your actions not others

Pause before you respond

Protect your energy

Self and respect your boundaries

Invest in those who invest in you

share when you feel safe

actively listen and accept the same in return

Trust your instinct

Allow yourself to pull back when you need to

#wisdom

#overthinkingkills

#bekind

#failureispartofsuccess

sending Unconditional Love Light Peace Healing Miracles and Hugs

Learn to Live

नारद जी अटूट बंधन

नारद जी की जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं

कल नारद जी की जयंती थी, सभी को नारदजी के बारे में पता है पढ़ा है,
【❤️🙏❤️
नारद जी ब्रह्माजी के मानस पुत्र हैं।
नारद जी अपने पूर्वजन्म मे वेदवादी ब्राह्मणों के यहाँ एक दासी पुत्र थे। इनका नाम हरिदास था, ये और इनकी माता संतो की सेवा किया करते थे। और यही मुख्य कारण था कि सत्संग और गुरु-कृपा से इनके अंदर भी भगवान से मिलने की चाह जागने लगी।
🙏❤️ नारद मुनि के चरित्र की विशेषतायें कुछ इस प्रकार है-
ध्यान से सत्संग सुनते थे, और मन मनाभाव होकर कीर्तन करते थे।
संतो के पावन सानिध्य मे रहते थे।
बहुत कम बोलते थे।
❤️🙏
नारद मुनि के उपर गुरुदेव की कृपा

सेवा करने पर गुरुदेव कृपा करते हैं। इनके गुरुदेव बार-बार इनको निहारते थे। गुरुदेव कहते- बच्चा बड़ा समझदार है। यह जीव जातिहीन है, पर कर्म-हीन नही। गुरु जिस पर प्रेम की नज़र डालते है उसका कल्याण होता है। ये संतो की झूठी पत्तले उठाते थे और उनका झूठन खा लेते थे। संतो का झूठन ग्रहण करने से इनकी बुद्धि धीरे-धीरे शुद्ध होने लगी थी। एक दिन गुरु जी ने इनसे कहा- हरिदास मैनें पत्तलो में महाप्रसाद रखा है उसे ग्रहण कर लो। इन्होंने वह प्रसाद ग्रहण किया और इनके सारे पाप नष्ट हो गये। इनको भक्ति का रंग लग गया। राधाकृष्ण का अनुभव हुआ।
गुरुदेव ने नारद जी को वासुदेव गायत्री का मंत्र दिया –

ॐ नमो भगवते तुभ्यं वासुदेवाय धीमहि । प्रधुम्नायनिरूद्धाय नमः सङ्कर्षणाय च ।।

इन्होने चार माह गुरुदेव की बहुत सेवा की। अब गुरुदेव गाँव छोड़कर जाने लगे। इन्होने भी साथ चलने की ज़िद की बोले-गुरु जी,आप मुझे साथ ले चलिए। मुझे मत छोड़ो। मैं आपकी शरण में आया हूँ। मेरी उपेक्षा मत करो। गुरुदेव ने विधाता का लेख पढ़ कर कहा कि तू अपनी माता का ऋणानुबंद्धि पुत्र है। इस जन्म से तुम्हें उसका ऋण चुकाना चाहिए। इसलिए माता का त्याग नहीं करना है। यदि तू माता को छोड़कर आयेगा तो तुझे दूसरा जन्म लेना पड़ेगा। तुम्हारी माता की आहें भजन मे विक्षेप करेंगी। तुम घर पर ही रहो।

नारद जी बोले- आपने तो कहा था की प्रभु भजन में जो विक्षेप करे उसका त्याग कर दो।

गुरुजी ने कहा- तू माँ का त्याग करे, ये मुझे अच्छा नहीं लगेगा। ठाकुर जी सब जानते हैं की तुम्हारी माता तुम्हारे भजन में विघ्न करेगी तो ठाकुर जी कोई लीला अवश्य करेंगे। सम्भव है ये तुम्हारी माता को उठा लेंगे अथवा तुम्हारी माता की बुद्धि को भगवान सुधार देंगे। तुम घर पर ही रहकर इस महामंत्र का जप करो। जप करने से प्रारब्ध भी बदल जाता है।
गुरुजी के द्वारा नारद मुनि को ज्ञानोपदेश
भगवान के प्रति सभी कर्मो को समर्पित कर देना ही संसार के तीनों तापों से बचने का एकमात्र उपाय है।
यद्पि सभी कर्म मनुष्यों को जन्म-मृत्यु रूप संसार के चक्र में डालने वाले हैं तथापि वे जब भगवान को समर्पित होकर किये जाते हैं तो उनका कर्त्तापना नष्ट हो जाता है।
इस लोक में शास्त्र विहित कर्म निष्काम भाव से सर्वहिताय भगवान की प्रसन्नता के लिये किये जाने पर भक्ति ओर ज्ञान की प्राप्ति होती है।
गृह-त्याग एवं भगवद्दर्शन
हरिदास गुरुदेव द्वारा दिये गये मंत्र का निरन्तर जप करते रहे। गुरुदेव ने वासुदेव गायत्री मंत्र का बत्तीस लाख जप करने को कहा था। बत्तीस लाख जप होगा तो विधाता का लेख भी मिटेगा। पाप का भी नाश होता है। नारद जी ने बारह वर्ष तक सोलह अक्षरी महामंत्र का जप किया और निरन्तर माँ की भी सेवा करते रहे। इसके बाद माता एक दिन गौशाला में गई| वहाँ उसको सर्प ने काट लिया। माता ने शरीर त्याग दिया। नारद जी ने यही माना कि भगवान ने अनुग्रह किया है। माता की देह का अग्नि-संस्कार किया। ये मातृ-ऋण से मुक्त हुये।

अब नारद जी ने सब कुछ त्याग दिया और भक्ति के लिये घर से निकल गये। लंबा रास्ता तय करने के बाद जंगल में एक नदी में स्नान किया, आचमन किया और एक पीपल के वृक्ष के नीचे आसन लगा कर बैठ गये।

नारद जी गुरु की आज्ञानुसार निरन्तर जप करते रहे। नारद जी को बालकृष्ण के दर्शन की बड़ी लालसा थी इसी तड़प के साथ ध्यान करते हुए एक दिन उन्हे सुन्दर नीला आकाश दीखा। फिर प्रकाश में से बालकृष्ण का स्वरूप प्रकट हुआ। इन्हें बालकृष्ण के मनोहर स्वरूप की झाँकी हुई। श्रीकृष्ण ने कस्तूरी का तिलक लगाया था। वक्षस्थल में कौस्तुभ-मणि की माला धारण की थी नाक में मोती था। आँखें प्रेम से भरी थी। इनको ऐसा आनंद हुआ कि दौड़ता हुआ जाऊँ और श्रीकृष्ण के चरणों में वन्दन करूँ। पर जैसे ही ये वन्दन करने गये तो श्रीकृष्ण अन्तर्ध्यान हो गये। इनको बहुत तड़प हुई की श्रीकृष्ण अन्तर्ध्यान क्यों हो गये। तभी आकाशवाणी हुई- कि इस जन्म में, तुम्हें अब मेरा दर्शन नहीं होगा। तेरे प्रेम को, तेरी भक्ति को पुष्ट करने के लिये मैनें तुम्हें दर्शन दिया है। परंतु तुझको अभी एक जन्म और लेना पड़ेगा। अभी तेरे मन में सूक्ष्म वासना रह गई है। इसके बाद नारद जी गंगा किनारे रहकर निरन्तर जप करते रहे। अंतकाल में राधाकृष्ण का चिंतन करते हुए इन्होने शरीर त्याग दिया।
इसके बाद हरिदास का जन्म ब्रह्माजी के यहाँ हुआ। इनका नाम नारद रखा गया। पूर्वजन्म के कर्मो का फल इनको मिला कि इनका मन स्थिर था। संसार की ओर कोई आकर्षण नहीं था। तभी से ये, भगवद्-कृपा से बैकुण्ठादि और तीनो लोको में बाहर-भीतर बिना रोक-टोक विचरण करते रहते हैं। इनका भगवद् भजन अखंड रूप से चलता रहता है।

एक दिन नारद जी गोलोक में गये, जहाँ सतत भगवान की लीला चलती रहती है। इन्हें वहाँ राधा-कृष्ण के दर्शन हुए। ये राधा- कृष्ण कीर्तन में तन्मय हो गये। प्रसन्न होकर राधाजी ने इनके लिये प्रभु से प्रार्थना की कि नारद जी को प्रसाद दें। श्री कृष्ण ने प्रसाद स्वरूप नारद जी को तम्बूरा भेंट किया। प्रभु ने कहा कृष्ण कीर्तन करते-करते जगत में भ्रमण करो और मुझसे जुदा हुये जीवों को मेरे पास लाओ।

इस तरह नारद जी अपनी वीणा पर तानछेड़ कर भगवान की लीलाओं का गान करते रहते हैं और भगवान से विमुख हुए जीवों को भगवान के सम्मुख करते हैं।

संकलित – श्रीमद्भागवत-महापुराण।
लेखक – महर्षि वेदव्यास जी।

In short
🤝🙏🤝
देवऋषि नारद- समाचार के देवता भी कहे जाते है।
संबंध – हिन्दू देवता, देवऋषि, मुनि
निवास स्थान – ब्रम्ह लोक
मंत्र – नारायण नारायण
अस्त्र – वीणा
माता -पिता – ब्रम्हा जी और सरस्वती जी
एक माँ की संतान – सनकादि ऋषि तथा दक्ष प्रजापति
सवारी – बादल (मायावी बादल जो बोल सुन सकता है)
🤝🙏🤝
हिन्दु शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्मा के छः पुत्रों में से छठे है। उन्होने कठिन तपस्या से ब्रह्मर्षि पद प्राप्त किया । वे भगवान विष्णु के अनन्य भक्तों में से एक माने जाते है।
शास्त्रों में इन्हें भगवान का मन कहा गया है। इसी कारण सभी युगों में, सभी लोकों में, समस्त विद्याओं में, समाज के सभी वर्गो में नारद जी का सदा से एक महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है। मात्र देवताओं ने ही नहीं, वरन् दानवों ने भी उन्हें सदैव आदर किया है। समय-समय पर सभी ने उनसे परामर्श लिया है। श्रीमद्भगवद्गीता के दशम अध्याय के २६वें श्लोक में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने इनकी महत्ता को स्वीकार करते हुए कहा है – देवर्षीणाम् च नारद:। देवर्षियों में मैं नारद हूं। श्रीमद्भागवत महापुराणका कथन है, सृष्टि में भगवान ने देवर्षि नारद के रूप में तीसरा अवतार ग्रहण किया और सात्वततंत्र (जिसे नारद-पांचरात्र भी कहते हैं) का उपदेश दिया जिसमें सत्कर्मो के द्वारा भव-बंधन से मुक्ति का मार्ग दिखाया गया है। नारद जी मुनियों के देवता थे।

वायुपुराण में देवर्षि के पद और लक्षण का वर्णन है- देवलोक में प्रतिष्ठा प्राप्त करने वाले ऋषिगण देवर्षि नाम से जाने जाते हैं। भूत, वर्तमान एवं भविष्य-तीनों कालों के ज्ञाता, सत्यभाषी, स्वयं का साक्षात्कार करके स्वयं में सम्बद्ध, कठोर तपस्या से लोकविख्यात, गर्भावस्था में ही अज्ञान रूपी अंधकार के नष्ट हो जाने से जिनमें ज्ञान का प्रकाश हो चुका है, ऐसे मंत्रवेत्ता तथा अपने ऐश्वर्य (सिद्धियों) के बल से सब लोकों में सर्वत्र पहुँचने में सक्षम, मंत्रणा हेतु मनीषियों से घिरे हुए देवता, द्विज और नृपदेवर्षि कहे जाते हैं।

इसी पुराण में आगे लिखा है कि धर्म, पुलस्त्य, क्रतु, पुलह, प्रत्यूष, प्रभास और कश्यप – इनके पुत्रों को देवर्षि का पद प्राप्त हुआ। धर्म के पुत्र नर एवं नारायण, क्रतु के पुत्र बालखिल्यगण, पुलह के पुत्र कर्दम, पुलस्त्य के पुत्र कुबेर, प्रत्यूष के पुत्र अचल, कश्यप के पुत्र नारद और पर्वत देवर्षि माने गए, किंतु जनसाधारण देवर्षि के रूप में केवल नारद जी को ही जानता है। उनकी जैसी प्रसिद्धि किसी और को नहीं मिली। वायुपुराण में बताए गए देवर्षि के सारे लक्षण नारदजी में पूर्णत:घटित होते हैं।

महाभारत के सभापर्व के पांचवें अध्याय में नारद जी के व्यक्तित्व का परिचय इस प्रकार दिया गया है – देवर्षि नारद वेद और उपनिषदों के मर्मज्ञ, देवताओं के पूज्य, इतिहास-पुराणों के विशेषज्ञ, पूर्व कल्पों (अतीत) की बातों को जानने वाले, न्याय एवं धर्म के तत्त्‍‌वज्ञ, शिक्षा, व्याकरण, आयुर्वेद, ज्योतिष के प्रकाण्ड विद्वान, संगीत-विशारद, प्रभावशाली वक्ता, मेधावी, नीतिज्ञ, कवि, महापण्डित, बृहस्पति जैसे महाविद्वानोंकी शंकाओं का समाधान करने वाले, धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष के यथार्थ के ज्ञाता, योगबल से समस्त लोकों के समाचार जान सकने में समर्थ, सांख्य एवं योग के सम्पूर्ण रहस्य को जानने वाले, देवताओं-दैत्यों को वैराग्य के उपदेशक, क‌र्त्तव्य-अक‌र्त्तव्य में भेद करने में दक्ष, समस्त शास्त्रों में प्रवीण, सद्गुणों के भण्डार, सदाचार के आधार, आनंद के सागर, परम तेजस्वी, सभी विद्याओं में निपुण, सबके हितकारी और सर्वत्र गति वाले हैं। अट्ठारह महापुराणों में एक नारदोक्त पुराण; बृहन्नारदीय पुराण के नाम से प्रख्यात है। मत्स्यपुराण में वर्णित है कि श्री नारद जी ने बृहत्कल्प-प्रसंग में जिन अनेक धर्म-आख्यायिकाओं को कहा है, २५,००० श्लोकों का वह महाग्रन्थ ही नारद महापुराण है। वर्तमान समय में उपलब्ध नारदपुराण २२,००० श्लोकों वाला है। ३,००० श्लोकों की न्यूनता प्राचीन पाण्डुलिपि का कुछ भाग नष्ट हो जाने के कारण हुई है। नारदपुराण में लगभग ७५० श्लोक ज्योतिषशास्त्र पर हैं। इनमें ज्योतिष के तीनों स्कन्ध-सिद्धांत, होरा और संहिता की सर्वांगीण विवेचना की गई है। नारदसंहिता के नाम से उपलब्ध इनके एक अन्य ग्रन्थ में भी ज्योतिषशास्त्र के सभी विषयों का सुविस्तृत वर्णन मिलता है। इससे यह सिद्ध हो जाता है कि देवर्षिनारद भक्ति के साथ-साथ ज्योतिष के भी प्रधान आचार्य हैं। आजकल धार्मिक चलचित्रों और धारावाहिकों में नारद जी का जैसा चरित्र-चित्रण हो रहा है, वह देवर्षि की महानता के सामने एकदम बौना है। नारद जी के पात्र को जिस प्रकार से प्रस्तुत किया जा रहा है, उससे आम आदमी में उनकी छवि लडा़ई-झगडा़ करवाने वाले व्यक्ति अथवा विदूषक की बन गई है। यह उनके प्रकाण्ड पांडित्य एवं विराट व्यक्तित्व के प्रति सरासर अन्याय है। नारद जी का उपहास उडाने वाले श्रीहरि के इन अंशावतार की अवमानना के दोषी है। भगवान की अधिकांश लीलाओं में नारद जी उनके अनन्य सहयोगी बने हैं। वे भगवान के पार्षद होने के साथ देवताओं के प्रवक्ता भी हैं। नारद जी वस्तुत: सही मायनों में देवर्षि हैं।
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❤️🙏

नारदजी

🌹🙏❤️🙏🌹
जिनके बारे में जब भी विचार करू मन प्रफुल्लित हो ही जाता है।वो गाना है ना चेहरे पे ख़ुशी छा जाती है आँखों में सुरूर आ जाता है जब तुम मुझे अपना कहते हो …अटूट समर्पण का भाव रहता है।
उनके बारे में सभी में ये विशेष भाव है कि वो देव ऋषि है और ज्ञानी है,अनमोल ज्ञान की गंगा का प्रवाह उनके अंतःकरण में चलता ही रहता है। हमेशा से जो भक्ति रस में डूबा हुआ एक जीता जागत व्यक्तित्व जो हमेशा प्रभु की लीला, कथाओं का स्मरण कीर्तन केरते ही रहते है।
एक भाव जो मुझे प्रेरणा देता है, वो ये कि उनकी महानता को जो समझ पाया वो तर गया समझो।
1) देवऋषि नारद- समाचार के देवता भी कहे जाते है…
इतना ज्ञानी की मेरी उनके प्रति श्रद्धा बढ़ती ही चली जा रही है।जैसे कोई ऐसा officer है जिसे दो मतभेद वालो के बीच मे बिठा दिया जाए तो वो दोनों के रग रग से वाकिफ है। उसे दोनों गुटों की खबर है, आते जाते हुए मैं सब पे नज़र रखता हूं, नाम नारदजी है मेरा सब की खबर रखता हूं।तेरी भी राम राम और उसकी भी राम राम लेकिन सटीक अपने target को trigger करते है।सुनना सबकी करना मन की, और मन ही करता मन ही भोगता। कुछ तो है जो मैं उनकी व्याख्या के प्रति आकर्षित होती जाती हूं। बादल उनका वाहन है। बदलो में सैर करना एक gaurdian angel ही तो है।मैं फरिश्तों को मानती हूं तो देव ऋषि भी तो ईश्वर के दूत ही तो है, जैसा मैं हमेशा ही कहती आई हु God has agents every where and their powers are very vast…ऋषि होना अपने आप मे सौभाग्य की बात होती है, पर ये तो
2)संबंध – हिन्दू देवता, देवऋषि, मुनि
देवताओं के ऋषि है,एक पल गर में सोचु तो कुण्डलिनी जैसे मुलादगर से सहस्त्रार तक के चक्कर काट के ब्रम्हांड में विलीन हो जाए वाली position। कितनी तपस्या की होगी। कितना खुद को तराशा होगा।यहाँ आधुनिक जगत में कॉलेज में एडमिशन लेने में घर वालो के प्राण निकल जाते है, डोनेशन, किताबें, वाहन, फलाना, ढिमका…
और वहाँ देव लोक में अपने आप को दर्ज कराने का कार्य करना- ” वाह ” सुनिए ज़रा सोचिए ना, की इस अनमोल जन्म को कहा व्यर्थ बिताया जा रहा है। हीरा जन्म अमोल था।
3) निवास स्थान – ब्रम्ह लोक
आप से पूछा जाए निवास थान तो आप और हम सांसारिक तौर पे अपना पता दे देंगे।पर यदि उसकी जगह शिव लोक लिखा जाए तो क्या अनुभूति है।क्या पल है। निशब्द हु मैं। उसकी व्याख्या करने मुश्किल है।मैं शिव भक्त हु इसलिए शिव लिखा आप आप के इष्ट को याद कर सकते है। सोचते ही आत्मा में दिव्य भाव जागृत हो ही जाते है।
4)मंत्र – नारायण नारायण
अपनी बात कहते ही अपने इष्ट को समर्पित कर देते है। जो हमसे नही सम्हालता वो परमेश्वर परमेश्वरी सम्हाल लेते है। जैसे दुर्गा सप्तशती पढने के पूर्व हम ॐ नमः चण्डिकाय कहते है और पश्यात श्री ॐ श्रीदुर्गा अर्पणामस्तु कहते है। बहुत depth है।गहरा भाव impact डालते है।आते हुए भी जय जय जाते हुए भी जय जयकार ईश्वर की वाह।
5)अस्त्र – वीणा
अब ये भी विचित्र किन्तु सत्य है, अस्त्र का नाम लेते ही नाव दुर्गा का स्वरूप आखों के सामने आ ही जाता है। लेकिन यहाँ तो ध्वनि है वीणा, जिसके एक तार से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है।जैसे आप ने सुना होगा घर की सफाई में नाद का बहुत महत्व रहता है। तभी तो उसकी शुद्धि के लिए हम विविध प्रकार के भजन स्तुति लगाते है।ये सब क्या है? सच पूछिए तो अस्त्र है जो ध्वनि से नकारात्मक ऊर्जा को ध्वस्त करते ही रहते है।
6) माता पिता ब्रम्हा जी और सरस्वती जी है
पिताजी ब्रम्हा जी है जो सृष्टि के रचेता है,जो रचनात्मक ऊर्जा के स्वामी है।और उनकी पत्नी माँ शारदा कला, ज्ञान,और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर स्वयं परा शक्ति का स्वरूप है।उनका जगत में अपने आप को साबित करना अनोखा और दुर्लभ ज्ञान है।जिनकी माता स्वयं माँ शारदे हो उनको तो ज्ञान की गंगा में डूबना एक आदत है दस्तूर है।जो वो चीर काल से निभाते जा रहे है।
7) सवारी- बादल
जो इतने हल्के है feather की तरह जो बदलो में भ्रमण करते है।जिन्हीने अपने व्यक्तित्व को सहज सरल सौम्य बनाए रखा।मन मस्तिष्क को ऊर्जा से जोड़े रखा। तभी तो float होना सीखाया।वाह जितना नारदजी के बारे में सोचु प्रेम बढ़ता ही चला जाता है।
मेरे सबसे प्रिय है और मैं उन्हें बेइन्तहा मोहब्बत करती हूं,सच पूछिए तो वो darling sweetheart है। उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। मैं उनको पूजती हु , जहाँ सांसारिक प्राणी कहता है दिमाग की बत्ती जलाओ, वहाँ उनका संग दिल की लौ जगाओ कहता है। सहज सरल भाव से उच्चतम गति मिलना, उनकी लीलाओं में सबसे प्रिय है ~ नारायण नारायण जो उनका मूल मंत्र है। सभी दुविधाओं का निचोड़ है, नारदजी कही भी टिकते नही है उनकी ऊर्जा है जो हर कोई नही झेल सकता।
ज्योत से ज्योत जगाओ सद्गुरु ज्योत से ज्योत जगाओ मेरा अंतर तिमिर मिटाओ सद्गुरु ज्योत से ज्योत जगाओ…
अल्लख निरंजन
नारायण नारायण
🌹🙏🌹
आप की अपनी नमः शिवाय

I am what I am…

❤️

Everything leads to silence

❤️
It is in the silence that you experience pure awareness. It’s in the silence that you experience bliss. It’s in the silence that you are. You are not any thing that you can describe. You have become the pure Godhead. You have awakened. Why not awaken now? Why continue to play games? Wake up. Know who you are. Be yourself. Leave the world alone. Again, your body, as it appears to you, will function in the world. And it will do whatever it came here to do. But leave it alone. Do not interfere with the process. Do not react to any conditionings. Keep identifying with the Self. The Self is I-am. You simply become aware that I-am.

That’s how you identify with yourself. You feel, “I-am, I-am, I-am.” I am what I am…If anything comes after that, inquire, “To whom has this come?” I am not this and I am not that, “I am.” Even if the word God comes after I am, your mind is playing tricks on you. Ask, “To whom does this come? The word God?” I am will suffice. That’s all you have to be is I am. Everything else is redundant, superfluous. If your mind tells you, “I am the body,” again inquire, “to whom does this come?” Whatever words are put into your mind, get rid of them. Listen to the silence. Listen to I am. Everything Leads To Silence
I am what I am…
Bless you all
Sending unconditional love light peace healing miracles and hugs
(((❤️)))

माँ तो माँ होती है…

Happy Mother’s day

आज मातृ भक्ति दिवस है
😀😀😀
क्या भक्ति सिर्फ एक दिन की होती है!!!
❤️
मांगने पर जहाँ पूरी हर मन्नत होती है
माँ के पैरों में ही तो वो जन्नत होती है
❤️
आज जो कुछ भी तुम हो जैसे भी हो तुम्हारा पहला कदम माँ ने ही हाथ पकड़ कर चलाया है। हर लीला में सहज रमता उसी का साया है। तुम्हारी तरक्की को सिर पे चूमती है, एक माँ ही है जो हर वक्त दुआ के फूल चुनती है। वेदों ने जो तेरी महिमा कही है सही है, तू करुणामयी और ममतामयी है सही है, माँ है तो फिर सब कुछ है इस जहाँ में,कौन कहता है यहाँ जन्नत नहीं है। जन्नत की दौलत को संजो के रखिये एकांत में इससे बड़ी कोई दौलत नही मिलती। बचपन के पलों लो स्वीकार करती हूं जब एक रुपए के अमरूद खरीदने का अरमान होता था, माँ को गले लग जाओ वो आलम अनमोल होता था, मुस्कुरा कर एक रुपया थमा देती थी। हाँ जी ये माँ है सब जान लेती थी।आज लाखों रुपये बेकार हैं वो एक रुपये के सामने जो माँ स्कूल जाते वक्त देती थी.. एक चुम्मी में बेशुमार प्रेम बरसता था, नटखट नादान बचपन अरबो की दौलत में रमता था,जहाँ माँ का गले लगना हर प्रश्न का स्वयं उत्तर होता था। ईश्वर की कृपा निज बरसती थी। घरों की चौखट तोरण, रंगोली,दियों से सजती थी। परमात्मा भी आने पर विवश होता था एक घर जब ईट पत्थरो से नही अपनो के अपने पन से चहकता था। हर एक दिल के तार और झनकार बजती जाती थी। युही चुटकीयो में मुस्कान लबों पे आ ही जाती थी, ओस की बूंदों की तरह प्रकृति झिलमिलाति थी। खिलखिलाता अल्लड़ पन नटखट नादान बचपन यौवन जब रंग लाता था।अनजान भी अपना होता चला जाता था।
वो (माँ) हमे आंतरिक शक्ति प्रदान करनी थी, अंतः करण को जगाने के लिए अक्सर वो डॉट दिया करती थी, गलती से गर एक गाल पे चमाट पड़ जाता था, माँ का दिल जैसे हथेली पर आ जाता था।
सबको खिलाया और खुद बिना खाए सोने लगी हाँ वो माँ है अपने अश्रुओं में खुद को भिगोने लगी।
उसकी डॉत का असर गहरा होता रहा आज भी जब खुद चल रही मै तो watch शब्द घूमता रहा।
💐🙏❤️🙏💐
Watch :
Watch your Word
Watch your Action
Watch your Thought
Watch your Character
Watch your Heart
💐🙏❤️🙏💐
उसकी शिक्षा ने कहाँ से कहाँ पहुँच दिया
बिनकुछ मांगे देती जा रही है ये माँ है साहब प्रकृति की अनमोल धरोहर ये सिर्फ प्रेम आंतरिक अपनापन दिए जा रही है।
❤️
बुलंदियों का बड़े से बड़ा निशान छुआ ,
उठाया गोद में माँ ने, तब आसमान छुआ
❤️

❤️
हजारों गम हों फिर भी मैं ख़ुशी से फूल जाती हूँ
जब हंसती है मेरी माँ तो मैं हर गम भूल जाती हूँ
❤️

आज उसी की कृपा से मैं कुछ कर पा रही हु, ये मेरी माँ का ही आशीर्वाद है जो मैं दीक्षा लिए जा रही हु। गायत्री माँ की उपासक में अनमोल शक्ति का प्रवाह है।जब भी मेरी माँ ने मुझे छुआ शिखर को झुकना पड़ा है।
माँ तो किसी की भी हो माँ होती है उसी में ईश्वर की असीम कृपा बसी होती है।शिव शिवाय की शक्ति को मैं समझती जा रही हु।ये अंश परा शक्ति का हर एक मे देखे जा रही हु। कभी दर्द ने जब दस्तक दी तो चेतना शक्ति ने मन मस्तिष्क में विराजमान माँ ने जागृत रखा तुम देह नही आत्मा हो एक पल में भाव बदल दिया।
विचित्र किंतु सत्य हमारे पूर्वजों ने कभी मातृ दिवस नही मनाया लेकिन माँ को कभी भी अकेला होने नही दिया।सोचने पर मजबूर कर देता है ना…
जब से होश संभाला है या यूं कहू की जान पाई हु तो अपने परिवार जनों के मुख से कभी नही सुना कि mothers day है तो दादी जी /नानी जी के लिए खीर बनाई जाए या हवन किया जाए, जो अब अपने समक्ष नही है, उनकी याद में कुछ बाटा जाए,हा लेकिन श्राध्द पक्ष में ये सब अनुभव किया है,पूर्वजो के लिए तर्पण, अर्पण क्या कुछ नही। सनातन धर्म मे तो रोज़ ही mothers day होता है क्यों कि हम सर्व प्रथम धरा को अपनी जननी मानते है।

” माता भूमि पुत्रोहं पृथिव्या”
Meaning: –
पृथ्वी मेरी माता है और मैंं उसका पुत्र हुंं
Earth is my mother I am her son / daughter ..

माँ हमारे धर्म मे बहुत उच्चतम स्थान है।तेरी कृपा बिना न हिले एक भी अनु लेते है स्वास तेरी दया से तनु तनु।

माँ अंनत है,आदि शक्ति है, कुण्डलिनी के रूप में हर शख्स में विराजमान है।चेतना है,चैतन्यमयी है। आनंद मयी है।
माँ को हम सभी भारतीय पूजते है, उनके चरणों को छू के प्रणाम करते है, उनसे अपने मस्तिष्क पे टिका लगवाते है। और तब ही घरों के बाहर कदम रखते है।उनकी दुआ हर क्षण हृदय में बसा आत्मविश्वास है। मेरे खयाल से,उन्ही के सिद्धांतों पे चल कर जीना सीख जाओ तो इससे बेहतरीन तोहफा माँ को नही दिया जा सकता है। पुराणों में माँ एक शक्ति है और कहा जाता है शक्ति के बिना शिव भी शव है। सच पूछिए तो माँ के बारे में लिखना सूरज को दिया दिखाना होगा। लेकिन मैं फिर भी माँ शारदे को नमन करती हूं कि वो आए और मेरे मन के तारो में विराजमान शक्ति को लिखने की अनुमति दे जय माँ शारदे कोटि कोटि नमन।
चलती फिरती आँखों से प्रार्थना देखी है,
मैंने स्वर्ग तो नहीं देखा है माँ देखी है।
माँ का गुण अपने आप में एक विज्ञान और कला है।
🌹🙏🌹
माँ की ममता, करुणा, स्नेह, आशीष, तो रग रग में दौड़ रहा है। मुझमे ही तू बस रही है जाने कैसे दिल की धड़कन माँ जय जय माँ गाए जा रही है। रोम रोम कतरा कतरा; तेरा एहसास है। सीधी साधी भोली भाली मैं ही सब से सच्ची हूँ,कितनी भी हो जाऊं बड़ी माँ आज भी तेरी बच्चि हूँ घुटनों से रेंगते-रेंगते जब पैरों पर खड़ी हो गयी,माँ तेरी ममता की छाँव में जाने कब बड़ी हो गयी…निडरता से अटल कदम बढ़ते चले जाते है, सच कहती हूं पल अनमोल नज़र आते है।सख्त राहों में भी आसान सफ़र लगता है,ये मेरी माँ की दुआओं का असर लगता है।
🌹🙏🌹
पूछता है जब कोई मुझसे कि दुनिया में मुहब्बत अब बची है कहाँ ? मुस्कुरा देती हूँ मैं और याद आ जाती है “माँ”
🌹🙏🌹
जीवन के इस दौरे में mothers day सभी मना रहे है, लेकिन माँ के दर्द को कितने समझ पा रहे है। माँ है भी और नही भी, जब आप किसी तक्लीफ मे पड जाते हो तो सर्व प्रथम माँ ही याद आती है, कहते है माँ का अनमोल नाता है तभी तो बच्चे खेलते वक्त गिर जाए तो मम्मी ही दर्द में कहता है।
ना जाने क्या था “माँ” की उस “फूँक” में
हर “चोट” ठीक हो जाया करती थी
“माँ” की हल्की सी एक “चपत” ज़मीन को
सारा “दर्द” ही “गायब” कर दिया करती थी

आज वृद्ध आश्रम बन रहे है,क्यों सब को आज़ादी चाहिए। रोक टोक पसंद नही। हमारे बचपन की यादों में और अभी के बच्चों की यादों में ज़मीन आसमान का अंतर है। संस्कार अनुशासन की नींव खोती जा रही है सयुक एकता अब एकांत में परिवर्तित हो रही है,
कही उन्होंने भी इस व्यवहार को अपना लिया है, गैर अपने होते जा रहे है। और अपनों को खबर तक नही की माँ किस पीड़ा से गुज़र रही है। बनावटी मुखौटे हर जगह दिख रहे है।

जो मांगू वो दे दिया कर ए ज़िन्दगी
बस तू मेरी माँ की तरह हो जा…

इतना कुछ खुद सह लेती है माँ, लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती,बस एक मां है जो मुझसे ख़फ़ा नहीं होती।इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है,माँ बहुत ग़ुस्से में होती है तो रो देती है।
उसका चुप रहना सन्नाटा ला देता है,हस्ता खेलता घर घर नही रहता । किसी भी ​मुश्किल का अब किसी को हल नहीं मिलता, ​शायद अब घर से कोई माँ के पैर छूकर नहीं निकलता..
न जाने क्यों आज के इंसान इस बात से अनजान हैं
छोड़ देते हैं बुढ़ापे में जिसे वो माँ तो एक वरदान है।
ख़ुद को इस भीड़ में तन्हा नहीं होने देंगे
माँ तुझे हम कभी बूढ़ा नहीं होने देंगे..

शारदे माँ की स्तुति याद आ गयी
किस मंजू ज्ञान से तू खुद को लुभा रही है,
किस भाव मे भगवती तू मगन हो रही है,
विनती हमारी माता तू क्यों न सुन रही है।
हम बालक कब से तुझको पुकार रहे है।
चरणों मे तेरी माता हम सिर झुका रहे है।
अज्ञान तुम हमारा माँ शीघ्र दूर करदो,
द्रुत ज्ञान शुभ्र हम में ओ वीणा पानी भर दो
बालक सभी को अपने ओ माँ है प्यारे
प्राणों से प्रिय तुम्हें है हम पुत्र सब दुलारे।
हमको दया मई अपने निकट तो लाओ
अमृत जगत का माता हम को भी पिलाओ
मातेश्वरी सुनो अब सुंदर विनय हमारी
कर दया दृष्टि हर लो बाधा घर की सारी

💝Happy Mother’s Day💝
मुझे समझना है तो,
बस अपना समझ लेना,
क्यूँकि हम अपनो का साथ,
खुद से भी ज्यादा निभाते हैं…
आप के अंदर बैठे शिव शिवाय को कोटि कोटि नमन
🌹💐🙏🏻जय जय माँ🙏💐🌹
💝Happy Mother’s Day💝नमः शिवाय🌹🙏❤️🙏🌹

Affirmation to self…

Hie all beautiful divine souls on planet

Namastey 🌹🙏🌹

Always be creative with positively positive efforts with unconditional love…
Paint your canvas with unconditional love, divine light, good health, happiness, miracles, magic, abundance, prosperity, spirituality, and great great success in your life…Stay tuned to inner child..
🌹🙏❤️🙏🌹

Thanks Almighty, Shiva Shivay, parmeshwar Parmeshwari, Lalita Ma, shiva yog shakti,Siddh guru mandal, Masters, Teachers, Healers, Angels, for making my dreams come true…
I am blessed with perfect body, perfect mind, perfect health, perfect soul and wonderful good luck…

I am not this body I am the soul shivohum..
I am divinely blessed and protected with divine cosmic golden light energy…
I love my self infinity and I am my favorite..
I love my near and dear ones my family friends relatives and accept them the way they are.. I am their favorite soul and darling sweetheart… every one is enjoying my company and we are thankful to Almighty for each and every miraculous second of wonderful family and I send unconditional love to universe …



This prayer takes about one minute! Pray it sincerely, and then those you send it to, will pray for you!
Avdhoot Baba ji the Master bless me even while I’m reading this prayer and bless the one that sent this to me in a special way.
Open supernatural doors and miracles in our lives today.
Give us a double portion of your Spirit as we regain
Emotional Health, Physical Health, Finances, Success, Loving Relationships, Children, Jobs, Homes, Marriages.
I thank you that nothing is over until YOU say it is over.

 

By Masters Avadhoot Babajis Grace:

1:Our households are blessed;

2:Our health is blessed;

3:Our relationships are blessed;

4:Our finances are blessed;

5:Our businesses are blessed;

6:Our jobs are blessed;

7:Our siblings are blessed;

8:Our temples are blessed;

9:Our decisions are blessed.

10:Good opportunities are on the way.

11.Our country and all its people are blessed.

12.Our planets are blessed.

13.Our gurumandala is blessed.

Our hearts’ desires are on the way; according to YOUR perfect will and plan for our lives.
Pray this prayer, then send it to EVERYBODY YOU KNOW


Sending unconditional love light peace healing miracles and hugs…
A flying kiss to you and divine in you 😘😘
Sending Blessing to all of you in need
Namah Shivay
🌹🙏🌹
(((❤️)))

Be beyond vision and clear about your goals

Higher frequency

Hie

All beautiful souls on planet,

Namastey🌹🙏🌹

Currently, we have high levels of plasma solar light flowing that is immeasurable onto the planet. This light will connect to the grid expanding light through the system raising vibrations… The light is active in its frequency yet only those ready, will receive what it will bring…Be open to universe to feel the frequency..

The light will penetrate the planet through the grid system then fluctuates like solar flashes with the mother’s heartbeat. This light beats as one with our mother earth heart grid and the crystalline grid.

Those that are ready will have the heartbeat of light connection… My vision shows me people pulsing light that are connected to her grid system. This is why all the years of leyline and gridwork have been so important.  Thank you lightworkers! I am grateful to universe for such divine souls on planet.

This light is at an elevated level i.e to raise to the higher spiritual level for those in higher frequency, to receive adjustment or attunement to the new levels to become accustomed with no discrimination, to the physical effects of the body.

The individuals ready now are the first ones to connect, then the wave of light that sweeps the others will be the one that causes distortion to those at lower frequencies, and we must be ready to assist them.

This is not a flash, it is a wave of light within each individuals structure to assist with change. Most persons will not know this is happening, depending on where they are in their process.

Individuals at higher frequencies are in acceptance of this new light now and will be the holders of this light, and its frequencies for others.  We, the higher level frequency holders, are here to maintain this level.

This is synchronous harmony of the Cosmic Heart, Mothers Heart, and Sacred Heart all active in one heartbeat. This is our connection to the divine, and all consistent with heart activated christ consciousness reality. We are becoming the light of the world. We are one.

Be at one with the light, and be one within thy sacred heart, for we are all one love.

Sending unconditional Divine Love light peace healing miracles and hugs

Bless you


इबादत है…

प्रेम, इश्क़,मोहब्बत, प्यार ये ईश्वर के बहुत powerful tools है,
इबादत है…
प्यार हो बंदों से ये सबसे बड़ी है बंदगी
❤️ उसी को होती है मोहब्बत जो इस काबिल हो,❤️
ईश्वर भी अपनी ऊर्जा भेजने से पहले सोचता है,चुनता वो ☝️ है क्या तुम इसे ग्रहण कर पाओगे,चुनाव सिद्ध गुरुओं का
सह सकोगे अद्भुत ऊर्जा ..
रहीस नही काबिल बनिये
ईश्वर का अमृत हर क्षण बरस रहा है, कोई भीगने को तैयार तो हो…
हर पल चमत्कार हो रहे है ,तुम अपने नैनो का सदुपयोग करो तो सही…
इंद्रियों का सदुपयोग ईश्वर की प्राप्ति है…

मैने माना इश्क़ खुद है सब से जुदा है…
नमः शिवाय

इश्क़ छुपता नही छुपाने से

जय माँ शीतला

💖❤️💛💚💙💜💗❤️💛💚💙💜💖

शीतला माता की सप्तमी की सभी को हार्दिक शुभ कामनाएं…

💖❤️💛💚💙💜💗❤️💛💚💙💜💖

जिस प्रकार माँ शीतला ने भक्त के घर की दरिद्रता झाड़ दी थी, उसी भांति आप के मस्तिष्क के भी बुरे विचारों को माँ भगवती बाहर निकाल के आप के पांचों तत्वों को जल से शुद्ध करे, और शुभ कार्य मे लिया गया दही और गुड़ आप सदैव सेवन करते रहे..आप के कर्म शुद्ध हो,आप के अंदर विराजमान शिवलिंग पे दूध का अभिषेक होता रहे।
लापसी सी मिठास अपनो के बीच बरकरार रहे, खाजली सी कड़क और गौरवर्ण हो,अटल हो शिद्ध ही अर्पण होगा…क्योंकि भगवती को अपने इरादों में शिद्धता बेहद प्रिय है, अपने कर्मों का थाल माँ भगवती को अर्पण करते चले चलो…मानस पूजा सर्वोपरि है। अक्षद से कल्पवृक्ष बनो जो भी आप के समक्ष आए कुछ तो आप से लेता जाए…कहते है शिवलिंग पे अक्षद चढ़ाने से सभी इच्छा पूरी होती है…अपने भीतर बसी भगवती शिव शिवाय को अक्षद चढ़ाते रहिए… श्री फल से फलीभूत हो…
मीठी पूड़ी की तरह भावों की मिठास में आप में रमती रहे
स्वादिष्ट प्रशाद की थाल से आप सभी की सेवा करती रहो
सब को अंतः कारण तक सदचित्त आनंद की प्राप्ति हो…
अपने जीवन से संतोष धन की प्राप्ति हो।
जो चाहते हो वही होगा
अपने मन मस्तिष्क को भी शांत रखिये,
प्रसन्न रहिए,
आप के अंदर विरजमान शिव शिवाय को कोटि कोटि नमन
शुभम
जय माँ शीतला
नमः शिवाय
🌹🙏🌹
Love you mumma
आप की अपनी बेटी

Go within to find Guidance

One has to go deeper into one´s own being to find the guide.

The guide is not outside, the guide is within you. One has to go deeper into one´s own being to find the guide. Once the inner guide is found there are no more mistakes, no repentance, no guilt. There is no question of doing good or doing bad; whatsoever one does is good. It is not a question of morality either; one´s very being is good and whatsoever comes out of it is good. One walks in light and one walks lightly because the head and the burden of the head is no more there. And when one walks in light and walks lightly, life becomes laughter, love, joy.

Once the guide is found, you have found the master within yourself

आप का दोस्त कौन है?

मुझसे पूछा गया आप के दोस्त कौन है?
जवाब मैं खुद अपनी दोस्त हु।मैं स्वयं की चेतना को कभी नही भूलती और वो शक्ति ही मेरी सबसे अच्छी सहेली सखी है।जो दिन रात मेरे संग मेरे एहसासों को समझती है।
प्रकृति- सूरज, चानंद ,सितारे ,पेड़, पौधे,निस्वार्थ भावनाओ से जीना सीखाते है। मानव रूठ जाता है। उसे मनना पड़ता है। प्रकृति रूठती नही। और जब कभी ऐसा हो तो प्रलय आ जाता है।
मेरा तन है वो भी मेरा सच्चा मित्र है। जो इंद्रियां है वही सत्य में मेरे अपने है। वो मेरे साथ लुका छुपी का खेल खेला करते है। कभी मन विछलित हो शांति की तलाश करो। और शांति मिली तो स्वयं को पाने की जिज्ञासा,उत्सुकता बढ़ती है।हम स्वयं जो है उस राह में भी चलना उस लक्ष को खोजना भी तो लुका छुपी या दौड़ बचपन के खेल ही है। उस पल की अनुभूति होना की आप मे कुछ है, जो भिन्न है औरों से तो जैसे नादानी में बचपन मे कहा जाता था कि पकड़ लिया…बस अब खेल आध्यात्मिक हो गया है।बदपना तो अब भी है पर खोजना ईश्वर की लीलाओं को है।
वायु, जल,अग्नि,आकाश,पृथ्वी से बना ये तन और मन का सही तालमेल रखना ही जैसे सी सॉ आप ने खेला होगा छोटे छोटे बच्चे खेलते है कभी एक उपर की ओर जाता है तो एक नीचे फिर दोनों पैरों से स्थिर हो के हस्ते है।यही बचपन अब वर्तमान में मन को स्थिर करने में जुटा है। और अभी ये विचार आया कि slider भी तो एक मजेदार खेल था बगीचे में सब से प्रिय हर एक नादान बालक का पसंदीदा खेल जहॉ सीढ़ियों से सिर्फ इसलिए उपर चढ़ा जाता था की उपर जा के फिसला जाए और फिसलते वक्त भी मुस्कान हुआ करती थी और फिर दौड़ के मैं पहले की होड़ थी।निर्मल भाव और बडी सीख, अब जैसे बड़े हो गए है उपर तो चले जाते है पर फिसल जाओ तो रुष्ट हो जाते है अरे यार कहॉ थे कहाँ आ गए। चलने में भी वो गति नही आती की अब कौन चले।चलो छोड़ो यही गलत है।Disney world में Roller coaster ride पे आप बैठे ही होंगे।नाव कभी यहॉ से उपर तो कभी नीचे। और नीचे आते वक्त हम क्या ठहाका मार के हसते थे। और यदि आप के प्रिय जन दर्शक हो तो उनको भी hie किया करते थे।कितना ज्ञानी था बचपन, मुझे वो गाना याद आ ही गया बच्चे मन के सच्चे खुद रूठे खुद मन जाए। एक बार सुनना ज़रूर यदि समय मिले तो दो कलियाँ फ़िल्म का है।
हॉ तो मैं कह रही थी मेरे दोस्त -मैं खुद हु ,ये सब व्यक्य सुनाने का उद्देश्य यही है कि आज भी मुझे मेरे अंदर बसा नादान बचपन बहुत प्रिय है। आज भी मैं slider या झूले पे झूलती ज़रूर हु।अपना वजूद लोग क्या कहेंगे में क्यों खोऊँ। अर्थात मैं स्वयं की प्रिय सखी हु। ईश्वर और गुरु तत्व मेंरे दोस्त है। फरिश्ते मेरे अपने है जो संग रहते है। और ये एहसास दिलाते है कि पगली ये दुनिया नही समझ पाएगी तुमको। इनको समझाने से अच्छा खुद को समझो कि तुम क्या हो। शांत माहौल में आंख मूंद कर सुखासन में बैठने पे जो पवन का झौका आता है। वो सबसे प्रिय होता है। बारिश की पहली फुआर ईश्वर ही अपना सच्चा मित्र है कि अनुभूति कराती है।जेठ महीने की गर्मी में मटके का ठंडा पानी और पीपल की ठंडी छांव ही आप के सच्चे मित्र है। वो भाव जो दिल धड़का दे वो मित्र है।वो निःस्वार्थ प्रेम मित्र है।वो अस्सु आने पर धत पगली बोल के खुद अश्रुओं को पोछना मित्र है।अर्थात मित्र कहा नही है। कण कण में अंश है अपनेपन का तो भ्रममाण्ड मित्र है।
हा तो मुझमे तू इस तरह बसा मेरा इष्ट महादेव मित्र है।
सो हम
शिवोहम
नमः शिवाय
Sending unconditional love light peace healing miracles and hugs
(((❤)))

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